सैंडविच
सैंडविच पटना रेलवे स्टेशन के बाहर आज बहुत गहमा गहमी की स्थिति है। कुछ बसें खड़ी हैं , बहुत सी कारें खड़ी हैं। डॉक्टरों की टीम , प्रशासन , पुलिस सब मुस्तैद हैं। जिले के दो सबसे बड़े अधिकारी (जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान) स्वयं वहां अपने माथे पर बल लिए आगे पीछे कर रह हैं और रह रह के अपनी घड़ी की ओर देख रहे हैं। दो बड़े बड़े शामियाने लगे हुए हैं। सभी शामियाने के अंदर बैठने के लिए बेंच एक कतार से लगी हुयी है। तभी एक रेलगाड़ी सीटी बजाते हुए प्लेटफार्म पर लगती है। पता चलता है कि यह ट्रेन कोटा से आयी है और इसमें लॉकडाउन के कारण वहां फँस गए संभ्रांत परिवार के बच्चे बच्चियाँ हैं , जो अपने रंग बिरंगे ट्रॉली बैग के साथ उतरते हैं। डीएम और एसपी साहब तालियों और मुस्कुराहट के साथ उनका स्वागत करते हैं। एक एक कर उन बच्चों को उस शामियाने में ले जाया जाता है जहां उनके स्वागत के लिए बिस्कुट , केला , सेब , पपीता , सैंडविच , जूस , पानी के बोतल इत्यादि है। कुछ देर बाद ही एक और रेलगाड़ी ...